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11/3/2026 3:16:24 PM

बीएसएम संस्थान की संपत्ति पर फिर आमने-सामने ब्राह्मण समाज और प्रबंधन, एसआईटी जांच की मांग

पांच दिन से परशुराम भवन में जारी है धरना, समाज ने कहा- 1500 करोड़ की संपत्ति पर एक परिवार ने किया कब्जा


दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::


रुड़की। बीएसएम शिक्षण संस्थान की संपत्ति को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। संस्थान को ब्राह्मण समाज की संपत्ति बताते हुए पिछले पांच दिनों से हरिद्वार रोड स्थित परशुराम भवन में धरने पर बैठे समाज के लोगों ने पत्रकार वार्ता कर संस्थान प्रबंधन की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने संस्थान की संपत्ति पर अपना अधिकार जताते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच कराने की मांग की।


पत्रकार वार्ता में सम्राट सुधा ने कहा कि बीएसएम शिक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1934 में ब्राह्मण समाज ने की थी। उनका आरोप है कि बाद में एक परिवार के लोगों ने संस्थान पर कब्जा कर बीएसएम चैरिटेबल ट्रस्ट बना लिया। उन्होंने दावा किया कि समाज के पास ऐसे तमाम दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे साबित होता है कि करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति ब्राह्मण समाज की है। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले की एसआईटी जांच कराने और जांच पूरी होने तक संस्थान में रिसीवर नियुक्त करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मामले की जांच नहीं कराई तो ब्राह्मण समाज भाजपा को वोट नहीं देगा।


वहीं सतीश शर्मा ने संस्थान प्रबंधन की ओर से उन्हें फर्जी अध्यक्ष बताए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से उन्हें अध्यक्ष चुना था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसएम को हाल ही में विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के दौरान 70 प्रतिशत दस्तावेज फर्जी लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक मामले की कोई उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई है। यदि संस्थान प्रबंधन एसआईटी जांच होने का दावा कर रहा है तो उसे जांच से संबंधित प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए।


गौरतलब है कि इससे पहले संस्थान के निदेशक रजनीश शर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर धरने पर बैठे लोगों को ब्लैकमेलर बताया था। उन्होंने दावा किया था कि इस प्रकरण में अब तक 51 जांच हो चुकी हैं, जिनमें धरनारत लोगों के आरोप निराधार पाए गए हैं। साथ ही उन्होंने सतीश शर्मा को भारतीय ब्राह्मण समाज का अध्यक्ष मानने से भी इनकार किया था।धरनारत लोगों ने संस्थान पदाधिकारियों को आमने-सामने बैठकर वार्ता करने की चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने दस्तावेज और साक्ष्य सार्वजनिक करने को तैयार हैं।


पत्रकार वार्ता में डॉ. अनीता शर्मा, मनोज शर्मा, बिट्टू शर्मा, दीपक शर्मा, मास्टर बिजेंद्र सिंह, सतीश शर्मा, राजकुमार दुखी और विनय शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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