
राज्यमंत्री शोभाराम प्रजापति ने किया प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन, प्रशिक्षकों को भी किया सम्मानित
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
रुड़की। जिला योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत माटी कला शिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन बुधवार, 28 अक्टूबर को रुड़की के रामनगर स्थित लिटा प्रेस ग्राउंड में किया गया। कार्यक्रम में दो माह का प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस दौरान मिट्टी से निर्मित विभिन्न उत्पादों एवं उपकरणों का प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माटी कला बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री शोभाराम प्रजापति रहे। कार्यक्रम का आयोजन जिला उद्योग केंद्र, हरिद्वार के महाप्रबंधक उत्तम कुमार तिवारी के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंची रुड़की महापौर अनीता अग्रवाल ने दीपावली पर सभी लोगों से अपील करके वह अपने घरों में माटी से बने दीपक ही जलाएं और माटी से बने बर्तनों का इस्तेमाल करें।कार्यक्रम का सफल संचालन जिला सहायक प्रबंधक अखिलेश सती ने किया।
पारंपरिक माटी कला को बढ़ावा देने पर दिया जोर
दो माह तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को मिट्टी से विभिन्न प्रकार के उत्पाद एवं उपयोगी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक माटी कला को संरक्षित करने के साथ ही कारीगरों को प्रोत्साहित करना और लोगों को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना रहा।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि शोभाराम प्रजापति ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने माटी कला से जुड़े पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने और इसे रोजगार के बेहतर माध्यम के रूप में विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षक सचिन एवं विकास को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश मंत्री रविंद्र चौधरी, मंडल अध्यक्ष गुरजिंदर सिंह, रिंकू, सुरेंद्र प्रजापति, महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष प्रतिभा चौहान, अजय राज, प्रजापति समाज के प्रदेश अध्यक्ष संजय प्रजापति, कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज, गणेशपुर के संस्थापक सत्येंद्र चौधरी, सेवानिवृत्त कर्नल विजयपाल सिंह तथा तेजपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपने हुनर का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यह पहल पारंपरिक माटी कला के संरक्षण, कारीगरों को प्रोत्साहन देने और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।
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