
दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::
रुड़की। रामनगर में आयोजित 63वें रामलीला महोत्सव में हनुमान जी के लंका पहुंचने, माता सीता से भेंट करने और लंका दहन की लीला का भव्य मंचन किया गया। मंचन के दौरान दिखाया गया कि माता सीता अशोक वाटिका में राक्षसियों के बीच बैठी होती हैं। रावण उन्हें अपने महल में चलने के लिए कहता है, लेकिन माता सीता उसके प्रस्ताव को ठुकरा देती हैं और कहती हैं कि प्रभु श्रीराम आएंगे और उसके अहंकार का अंत करेंगे।

इसके बाद हनुमान जी माता सीता को भगवान श्रीराम की अंगूठी देते हैं, जिसे देखकर उन्हें विश्वास हो जाता है कि हनुमान जी प्रभु श्रीराम के दूत हैं। माता सीता से भेंट के बाद हनुमान जी को भूख लगती है और वह अशोक वाटिका में लगे केले, अमरूद सहित अन्य फलों को खाने लगते हैं। इस दौरान वह पेड़ों को उखाड़कर वाटिका में उत्पात मचाते हैं और दर्शकों की ओर फल उछालते हैं, जिन्हें लोगों ने प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।

अशोक वाटिका में उत्पात की सूचना मिलने पर मेघनाद हनुमान जी को पकड़कर रावण के दरबार में ले जाता है। रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी जाती है, जिसके बाद हनुमान जी पूरी लंका में आग लगा देते हैं। लंका दहन के दृश्य को देखकर दर्शकों में उत्साह देखने को मिला और रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।इस अवसर पर रामनगर रामलीला कमेटी के प्रधान राम जी भटेजा सहित कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों में जगदीश लाल मेहंदी रत्ता, गुलशन अनेजा, राम भटेजा, धर्मपाल लखानी, संजीव कक्कड़, नितेश ग्रोवर, मन्नू मेहंदी रत्ता, संचित भटेजा, हरिओम अनेजा और सचिन तनेजा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

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