

दैनिक रुड़की (योगराज पाल):::
रुड़की। बीटी गंज रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य रामलीला के छठे दिन मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। रामलीला का मंचन श्री गणेश वंदना और श्री राम दरबार की वंदना के साथ अत्यंत अलौकिक रूप से शुरू हुआ। इसके बाद कलाकारों ने रामायण के सबसे मर्मस्पर्शी और नाटकीय प्रसंग-राजा दशरथ द्वारा भगवान राम के राजतिलक की घोषणा, कैकयी-मंथरा संवाद और राम वनवास का ऐसा जीवंत अभिनय किया कि पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।


राजतिलक की घोषणा और मंथरा की कुटिल चाल
लीला के मुख्य आकर्षण में राजा दशरथ द्वारा प्रजा और मंत्रियों के बीच श्रीराम के राजतिलक का ऐतिहासिक ऐलान किया जाता है। अयोध्या में उत्सव का माहौल बन जाता है, लेकिन रानी कैकयी की दासी मंथरा को जब इस बात का पता चलता है, तो वह ईर्ष्या और षड्यंत्र के वशीभूत होकर कैकयी के पास पहुंचती है। मंथरा के कुटिल संवादों और बहकावे में आकर कैकयी के मन में मंथन शुरू होता है, और वह राजा दशरथ से अपने पुराने दो वचनों को मांगने का निर्णय लेती है।


कोप भवन का दृश्य और कैकयी-दशरथ संवाद
इसके बाद कथा कोप भवन की ओर बढ़ती है, जहां कैकयी रुष्ट होकर बैठ जाती हैं। महाराज दशरथ जब कैकयी को मनाने पहुंचते हैं, तो कैकयी उनसे अपने वे दो वचन मांगती हैं—पहला, अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का सिंहासन और दूसरा, प्रभु श्रीराम के लिए 14 वर्षों का वनवास। इस दृश्य में कलाकारों ने अपने संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


माता की आज्ञा मानकर वन को प्रस्थान
लीला के अंतिम और सबसे भावुक चरण में, कैकयी राम को कोप भवन में बुलाकर अपने पिता (दशरथ) के वचनों से अवगत कराती हैं। बिना किसी मोह के श्रीराम अपनी माता कैकयी की आज्ञा को सिर-आंखों पर रखते हुए सहर्ष वन जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। राम के वन प्रस्थान के इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

लीला का यह मार्मिक और सुंदर मंचन देखने के लिए बीटी गंज पंडाल में दर्शकों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। हर उम्र के दर्शक रात तक पंडाल में डटे रहे और कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय की सराहना करते नजर आए। समिति के पदाधिकारियों ने सफल मंचन के लिए सभी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
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