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10/7/2026 4:52:04 PM

मेडिकेटेड साबुन पर 18 प्रतिशत जीएसटी की मांग से फार्मा उद्योग में चिंता

भगवानपुर, रुड़की और इकबालपुर क्षेत्र की बड़ी संख्या में इकाइयां प्रभावित होने की आशंका, उद्योग ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की


दैनिक रुड़की (रियाज कुरैशी)::


रुड़की। भगवानपुर, रुड़की और इकबालपुर समेत आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित फार्मा और इससे जुड़े उद्योगों में मेडिकेटेड और टॉयलेट साबुन पर जीएसटी की दर को लेकर चिंता बढ़ गई है। उद्योग प्रतिनिधियों का आरोप है कि केंद्रीय जीएसटी विभाग के अधिकारी विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर इन उत्पादों पर 18 प्रतिशत जीएसटी की दर से भुगतान करने का दबाव बना रहे हैं। वहीं उद्योग का दावा है कि संबंधित अधिसूचना के तहत इन उत्पादों पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत निर्धारित है।

रुड़की क्षेत्र के भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में फार्मा और संबद्ध विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं। इसके अलावा इकबालपुर और रुड़की क्षेत्र में भी कई इकाइयां दवा एवं इससे जुड़े उत्पादों का निर्माण करती हैं। ऐसे में जीएसटी दर को लेकर चल रहे विवाद का सीधा असर स्थानीय उद्योगों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स, हरिद्वार के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की अधिसूचना संख्या 9/2025-केंद्रीय कर (दर), 17 सितंबर 2025 के तहत टैरिफ मद 34011110 में शामिल टॉयलेट साबुन की जीएसटी दर घटाकर पांच प्रतिशत की गई थी। उद्योग का दावा है कि इसमें मेडिकेटेड टॉयलेट साबुन भी शामिल है। इसके बाद निर्माताओं ने 22 सितंबर 2025 से उत्पादों का अधिकतम खुदरा मूल्य कम करते हुए जीएसटी दर में कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया था।

अब उद्योग का कहना है कि कुछ इकाइयों से उन्हीं उत्पादों पर पुरानी 18 प्रतिशत जीएसटी दर के हिसाब से कर भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है। इससे कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है। अनिल शर्मा के अनुसार यदि उत्पादों के वर्गीकरण अथवा जीएसटी दर को लेकर कोई विवाद है तो उसका निस्तारण निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।

बिना नोटिस भुगतान के दबाव का आरोप

उद्योग से जुड़े लोगों का आरोप है कि कुछ मामलों में औपचारिक कारण बताओ नोटिस अथवा कर मांग के निर्धारण के बिना ही विभागीय स्तर पर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी विवादित कर मांग के लिए नियमानुसार नोटिस जारी कर संबंधित इकाई को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।

रिफंड अटकने से बढ़ रही कार्यशील पूंजी की समस्या

फार्मा उद्योग की एक अन्य चिंता उल्टे कर ढांचे के तहत मिलने वाले जीएसटी रिफंड को लेकर भी है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि कई कंपनियों की कार्यशील पूंजी पहले से ही कर प्रणाली में फंसी हुई है। ऐसे में वैध रिफंड के निस्तारण में देरी से उद्योगों पर आर्थिक दबाव और बढ़ रहा है।

निवेश और रोजगार पर असर की आशंका

उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि भगवानपुर और रुड़की क्षेत्र उत्तराखंड के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल हैं और यहां फार्मा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यदि जीएसटी को लेकर लगातार असमंजस और अलग-अलग व्याख्या की स्थिति बनी रहती है तो इसका असर नए निवेश और विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है। कंपनियां दूसरे राज्यों में निवेश अथवा उत्पादन स्थानांतरित करने पर विचार करती हैं तो इसका नुकसान उत्तराखंड को रोजगार, निवेश और राजस्व के स्तर पर उठाना पड़ सकता है।

एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स, हरिद्वार के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने उत्तराखंड सरकार, वित्त विभाग और संबंधित जीएसटी अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर मेडिकेटेड और टॉयलेट साबुन पर लागू जीएसटी दर को स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही सभी अधिकारियों के लिए एक समान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है, ताकि भगवानपुर, रुड़की, इकबालपुर समेत प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित इकाइयों को अलग-अलग व्याख्या के कारण परेशानी न उठानी पड़े।

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