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05-07-2026 11:01:47

कलियर में दुकानों पर नास्ते में इस्तेमाल किए जाने वाले शीरमाल को ठेके में किया शामिल छोटे दुकानदारों में बढ़ी चिंता--ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा अन्य सभी दुकानदारों को भी शीरमाल बेचने का अधिकार है...

दैनिक रुड़की (इकराम अली)::


पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में इस वर्ष सालाना ठेकों की प्रक्रिया के तहत एक नया बदलाव सामने आया है। दरगाह प्रशासन ने पारंपरिक सोहन हलवे के साथ-साथ अब नास्ते के साथ खाने वाले शीरमाल को सोहन हलवा परांठा के ठेके के साथ शामिल किया गया है। सोहन हलवा के ठेके में शीरमाल शामिल नही था केवल ठेकेदार द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर शीरमाल को ठेके में शामिल किया गया है।इसे ठेके में शामिल किए जाने के बाद छोटे गरीब दुकानदारों में रोष व्याप्त है।


वही वर्षों से शीरमाल बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले छोटे दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।जबकि शीरमाल एक केसर-युक्त, हल्की मीठी पारंपरिक फ्लैटब्रेड है जिसे मैदे, दूध, चीनी और घी से बनाया जाता है। मुगलई व्यंजनों की यह खास रोटी तंदूर में पकाई जाती है।यह चाय के नास्ते के साथ खाया जाता है।स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पहले वे स्वतंत्र रूप से शीरमाल की बिक्री कर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे,लेकिन अब ठेका व्यवस्था लागू होने से उनका रोजगार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।इस निर्णय के बाद क्षेत्र में चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि दरगाह साबिर पाक देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीनों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में लगातार बढ़ती ठेका व्यवस्था और व्यावसायिक गतिविधियों से धार्मिक स्थल का स्वरूप प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि श्रद्धालु जायरीन यहां आध्यात्मिक शांति और आस्था के साथ आते हैं,इसलिए व्यवस्थाओं में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।गौरतलब है कि दरगाह क्षेत्र में पहले से ही प्रसाद,सोहन हलवा और अन्य कई दुकानों के ठेके संचालित हैं। दरगाह कार्यालय से ठेक में सोहन हलवा ओर हलवा पराठा की केवल एक दुकान आवंटित की जाती है।जिस पर ठेकेदार हलवा पराठा व सोहन हवाले की बिक्री कर सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ अधिकारियों को गुमराह कर समय-समय पर नए नियम लागू किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि यही व्यवस्था जारी रही तो भविष्य में चाय, लंगर नियाज बनाने और खाने, पीने के होटल समेत अन्य छोटे कारोबार भी ठेका प्रणाली के दायरे में आ सकते हैं।जिससे स्थानीय व्यापारियों के सामने रोजगार का संकट और गहरा सकता है। छोटे दुकानदारो ने प्रशासन से शीरमाल को ठेके में शामिल नही करने की मांग की है।ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक राम चंद्र शेट ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नही है। दरगाह कार्यालय से पत्रावली मंगाकर जांच की जाएगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकता।ठेकेदार को इस तरह की कमाई करने से सख्त मना किया गया है। अन्य सभी दुकानदारों को शीरमाल बेचने का अधिकार है।

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