दैनिक रुड़की (रियाज कुरैशी)::
रुड़की। अशरा-ए-मोहर्रमुल हराम की पहली मजलिस इमली रोड स्थित बड़ा इमामबाड़ा में अकीदत और एहतराम के साथ आयोजित की गई। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया।
मजलिस को विशेष रूप से नजफ़ अशरफ़ से तशरीफ लाए मौलाना सैयद हसन हैदर नजफ़ी ने खिताब किया। उन्होंने अपने बयान में हजरत मौला अली की विलायत, उनकी सीरत और उनसे मोहब्बत के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मौला अली की शिक्षाएं इंसान को सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
इसके बाद मौलाना ने कर्बला के महान शहीद इमाम हुसैन की अज़ीम कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी शहादत केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए अमन, न्याय और भाईचारे का संदेश है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत इंसानों को आपस में जोड़ने और मानवता की रक्षा का पैगाम देती है।
मौलाना हसन हैदर नजफ़ी ने मौजूदा हालात पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इमाम हुसैन का सच्चा चाहने वाला हर मजलूम के साथ खड़ा होता है और हर जालिम के खिलाफ आवाज बुलंद करता है। यही कर्बला का संदेश और हुसैनी विचारधारा की पहचान है।
मजलिस के अंत में उन्होंने कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों पर ढाए गए अत्याचारों तथा मसाइब का दर्दनाक जिक्र किया, जिसे सुनकर अकीदतमंद गमगीन हो गए। इसके साथ ही मजलिस का समापन हुआ और इमाम हुसैन की बारगाह में खिराज-ए-अकीदत पेश की गई।
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