

दैनिक रुड़की (योगराज पाल):::
रुड़की। गंगा किनारे स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास परम पूज्य श्री श्री नीलमणि महाराज जी ने अपने श्रीमुख से भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए गोवर्धन पूजा का महत्व समझाया और रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह के प्रसंग से पंडाल को सराबोर कर दिया। इस अवसर पर भगवान को छप्पन भोग भी अर्पित किए गए।


कलयुग में केवल हरि नाम ही मनुष्य का उद्धार करता है: नीलमणि महाराज कथा के दौरान महाराज जी ने आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा आज का मनुष्य दिन-रात केवल पैसा कमाने की अंधी दौड़ (भागम-भाग) में लगा हुआ है, जिससे उसका ध्यान ईश्वर से भटक गया है। लेकिन इस कलिकाल (कलयुग) में अगर मनुष्य अपनी व्यस्त जिंदगी से कुछ समय निकालकर प्रभु के चरणों में बैठता है और उनका ध्यान करता है, तो भगवान उसका उद्धार निश्चित ही कर देते हैं।"


महाराज जी ने आगे बताया कि सतयुग और त्रेतायुग की कठिन साधना की तुलना में, कलयुग में यदि मनुष्य क्षणिक मात्र (कुछ पल) के लिए भी सच्चे मन से प्रभु की भक्ति कर लेता है, तो भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए समर्पित है।

भजन और झांकियों पर झूमे श्रद्धालु
रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के दौरान जैसे ही भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई, पूरा पंडाल "जय श्री कृष्णा" के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए और झूमकर नृत्य किया। गोवर्धन पूजा के बाद सभी भक्तों को छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में पंडित राम गोपाल पाराशर, अध्यक्ष सुभाष सरीन, प्रमोद जोहर, प्रदीप परुथी, विजय सेठी, सतीश सैनी, नरेश, लव कुश, नरेंद्र, सरिता गोयल, बाला रानी, नीति रानी, कमलेश, चांदनी दीक्षित, धारा, और आशीष समेत सैकड़ों भक्तगण शामिल हुए। सभी ने महाराज जी से आशीर्वाद लिया और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया।
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