
दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::
रुड़की। शहर के उपकारागार के सामने स्थित जन जीवन अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया। गर्भवती महिला के ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि गलत उपचार और ऑपरेशन में भारी अनियमितता के कारण महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और वह जिंदगी-मौत के बीच जूझ रही है।
जानकारी के अनुसार बहादराबाद क्षेत्र के सलेमपुर निवासी राजकुमार अपनी 23 वर्षीय पत्नी मोनी को तबीयत खराब होने पर निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड कराने के बाद गर्भ खराब होने की बात कही और तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। आरोप है कि 13 मई को ऑपरेशन कर दिया गया और तीन दिन बाद महिला को डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया।

राजकुमार के मुताबिक घर पहुंचने के कुछ दिन बाद ही मोनी की हालत फिर बिगड़ गई। परिजन उसे दोबारा उसी अस्पताल में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि वहां चिकित्सकों ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। हालत लगातार बिगड़ने पर महिला को हरिद्वार के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन में भारी लापरवाही और अनियमितता की बात कही। वर्तमान में महिला वेंटिलेटर पर भर्ती बताई जा रही है।
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। हंगामे के दौरान योगेश प्रमुख ने अस्पताल संचालक से वार्ता की। बातचीत में अस्पताल संचालक ने गलती स्वीकार करते हुए महिला के इलाज का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन दिया। हालांकि मीडिया के सामने अस्पताल प्रबंधन ने खुलकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। संचालक का कहना था कि ऑपरेशन किसी अन्य चिकित्सक द्वारा किया गया था और वह इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं दे सकते।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जन जीवन अस्पताल में पहले भी कई बार इलाज में लापरवाही को लेकर विवाद और हंगामे हो चुके हैं। घटना के बाद क्षेत्र में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी बनी हुई है।
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