
गंगनहर तट पर पुष्पांजलि अर्पित, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने किया नमन
दैनिक रुड़की(योगराज पाल)::
रुड़की। हिंदू हृदय सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जयंती के अवसर पर गंगनहर किनारे स्थित उनकी प्रतिमा पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों और समाज के लोगों ने श्रद्धापूर्वक पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में वीर शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान के साहस, पराक्रम और मातृभूमि के प्रति समर्पण को याद किया गया।
महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनिल पुंडीर एडवोकेट ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान (पृथ्वीराज तृतीय) 12वीं सदी के महान राजपूत सम्राट थे, जिन्होंने अजमेर और दिल्ली को अपनी राजधानी बनाकर उत्तर-पश्चिम भारत के विशाल भूभाग पर शासन किया। वे अपनी अदम्य वीरता, उत्कृष्ट सैन्य कौशल और मोहम्मद गौरी के खिलाफ ऐतिहासिक प्रतिरोध के लिए सदैव स्मरण किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वीराज चौहान का जीवन साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है।
महासभा के युवा प्रदेश अध्यक्ष कुंवर संजीव कुशवाह ने अपने संबोधन में बताया कि पृथ्वीराज चौहान ने वर्ष 1177 ईस्वी में अल्पायु में ही अपने पिता के निधन के बाद राजगद्दी संभाली और शीघ्र ही अपनी वीरता का परचम लहराया। उन्होंने एक विशाल सेना का नेतृत्व करते हुए मुहम्मद गोरी को परास्त किया और विदेशी आक्रमणों का डटकर सामना किया।
उन्होंने कहा कि पृथ्वीराज चौहान ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, इसलिए वे भारतीय इतिहास में अमर हैं।
कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने एकजुट होकर वीर सम्राट के आदर्शों पर चलने और युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर गोपाल सिंह, यशवंत सिंह चौहान, भोजराज सिंह पुंडीर, राजीव राणा (भलस्वा गाज) सहित क्षत्रिय समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वातावरण “वीर पृथ्वीराज अमर रहें” के जयघोष से गूंज उठा।
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