
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना):::
रुड़की। मदरहुड विश्वविद्यालय के 'फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड बिज़नेस स्टडीज़' द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। सूरजमल विश्वविद्यालय, किच्छा के 'स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़' के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का विषय “रचनात्मकता, नवाचार और अनुसंधान जगत में प्रगति: सतत सृजन के लिए विचारों का जुड़ाव” रहा।

82 शोध पत्रों का हुआ वाचन
सम्मेलन के दूसरे दिन तीन समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों से आए शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने कुल 82 शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में मुख्य रूप से डिजिटल व्यवसाय मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अनुप्रयोग, सतत वित्त और सामाजिक उद्यमिता जैसे आधुनिक विषयों पर गहन चर्चा हुई।

ज्ञान का सृजन ही शिक्षा का असली उद्देश्य: प्रो. भाकर
समापन सत्र के मुख्य अतिथि, प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, इंदौर के कुलपति प्रो. एस. एस. भाकर ने अपने संबोधन में कहा, "आज के युग में शोध केवल अकादमिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। युवाओं को डिग्री से आगे बढ़कर समाजोपयोगी ज्ञान का सृजन करना चाहिए।"

विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. अनिल रायपुरिया ने शोध में नैतिकता और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, मलेशिया से वर्चुअली जुड़े डॉ. नरेंथरन कालीअप्पन ने वैश्विक चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन और डिजिटल विघटन के समाधान के लिए सामूहिक अंतर्राष्ट्रीय शोध पर बल दिया।

उत्कृष्ट शोधार्थी हुए सम्मानित
कार्यक्रम की संयोजक प्रो. नीता माहेश्वरी ने दो दिवसीय आयोजन की उपलब्धियों की जानकारी दी और सभी का आभार व्यक्त किया। समापन सत्र के अंत में उत्कृष्ट शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो. पी. के. अग्रवाल, डॉ. पुलकित, डॉ. एस. ए. भारद्वाज, सुश्री मधुरानी सहित आयोजन समिति के समस्त सदस्यों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन सुश्री मधु रानी द्वारा किया गया।

© Dainik Roorkee. All Rights Reserved. Design by Xcoders Technologies