
दैनिक रुड़की (योगराज पाल):::
रुड़की। मदरहुड विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड बिज़नेस स्टडीज़ द्वारा सूरजमल विश्वविद्यालय के सहयोग से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। "रचनात्मकता, नवाचार और अनुसंधान जगत में प्रगति" विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य शोधार्थियों को एक वैश्विक मंच प्रदान करना है। दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस सत्र में भारत के अलावा उज्बेकिस्तान और मस्कट के विद्वानों ने भी शिरकत की। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि 21वीं सदी केवल डिग्री की नहीं, बल्कि कौशल और सामाजिक समस्याओं के समाधान की है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा ने कहा कि भारत 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने एआई (AI), स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की। मुख्य अतिथि प्रो. बी.बी. मलिक (कुलपति, राजेंद्र विवि, ओडिशा) ने कहा कि शोध राष्ट्र निर्माण का सशक्त उपकरण है। वहीं, सूरजमल विवि के कुलपति प्रो. सतीश कुमार शर्मा ने शोध में नैतिकता और मौलिकता की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि डिजिटल परिवर्तन के युग में शोधकर्ताओं की जिम्मेदारी अब पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।


सम्मेलन के निदेशक प्रो. पी.के. अग्रवाल ने बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन में 100 से अधिक शोध पत्र पढ़े जाएंगे। ओआरएफ के वाइस प्रेसिडेंट प्रो. हर्ष वी. पंत ने नवाचार को नेतृत्व की कुंजी बताया। मस्कट से जुड़े प्रो. आनंद एस. ने फिनटेक और ग्रीन फाइनेंस में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की वकालत की, जबकि उज्बेकिस्तान से प्रो. के. शंकर गणेश ने प्रभावी प्रबंधन को वैश्विक समस्याओं का हल बताया। प्रथम तकनीकी सत्र में 20 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर कुलसचिव अजय गोपाल शर्मा सहित विश्वविद्यालय के समस्त डीन, विभागाध्यक्ष और भारी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

© Dainik Roorkee. All Rights Reserved. Design by Xcoders Technologies