
दैनिक रुड़की (योगराज पाल):::
रुड़की। मदरहुड विश्वविद्यालय के विधि संकाय में आयोजित ‘राष्ट्रीय विधिक चौपाल 1.0’ में विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक कानून की रीढ़ बताया। कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा ने कहा कि धर्मशास्त्र और नीतिशास्त्र के सिद्धांत समाज को जोड़ने का काम करते हैं। हमें पश्चिमी मॉडल के बजाय अपने मूल विधिक मूल्यों को अपनाना होगा। मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) हरबंश दीक्षित (सलाहकार, असम राज्यपाल) ने कहा कि भारत की प्राचीन न्याय प्रणाली दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक और लोक-कल्याणकारी रही है।
विशेष अतिथि प्रो. (डॉ.) देवेंद्र भसीन ने नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए 'डिकोलोनाइजेशन ऑफ लॉ' की बात कही। उन्होंने छात्रों को प्राचीन स्मृति ग्रंथों में वर्णित न्यायिक प्रक्रियाओं को पढ़ाने पर जोर दिया। उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के प्रो. (डॉ.) अनिल दीक्षित ने कौटिल्य के अर्थशास्त्र को आधुनिक जीएसटी और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का आधार बताया। उन्होंने कहा कि प्राचीन 'आचार संहिता' आज के साइबर अपराधों और मीडिया ट्रायल जैसी चुनौतियों से निपटने में सक्षम है, बशर्ते हम इसे नीति-निर्माण का हिस्सा बनाएं।
पैनलिस्ट डॉ. लक्ष्मी प्रिया और डॉ. गगनदीप कौर ने क्रमशः पर्यावरण और डेटा सुरक्षा पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि 'प्रकृति: रक्षति रक्षिता:' का सिद्धांत सतत विकास के लिए अनिवार्य है। डेटा प्रोटेक्शन को भारतीय 'मर्यादा' के साथ जोड़ने की आवश्यकता बताई गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपशिखा ने किया। इस दौरान अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) बोधिसत्व आचार्य सहित 300 से अधिक छात्र उपस्थित रहे। अंत में विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
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