दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
रुड़की। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन, रुड़की द्वारा दानवीर भामाशाह जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश देते हुए गौ सेवा का संकल्प लिया गया तथा उपस्थित वैश्य अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों व सदस्यों ने गौ माता की पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम की शुरुआत भामाशाह जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
संस्था के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने दानवीर भामाशाह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 29 अप्रैल 1547 को मेवाड़, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध के बाद भामाशाह जी ने महाराणा प्रताप को अपनी निजी संपत्ति से इतना धन दान दिया था, जिससे 25 हजार सैनिकों का 12 वर्षों तक निर्वाह संभव था। इस सहयोग से महाराणा प्रताप ने पुनः अपनी सैन्य शक्ति संगठित कर मुगल शासकों के विरुद्ध संघर्ष किया और मेवाड़ की स्वतंत्रता पुनः स्थापित की। उन्होंने सभी से भामाशाह जी के दान, त्याग और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फोनिक्स यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष चेरव जैन ने भी भामाशाह जी के जीवन दर्शन पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज को उनकी प्रेरणा से सेवा और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाना चाहिए।गोष्ठी में श्री वैश्य अग्रवाल सभा के अध्यक्ष संदीप गोयल, युवा अग्रवाल सभा के अध्यक्ष पंकज सिंघल तथा संरक्षक के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी जी.डी. गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार भामाशाह जी को दानवीर की उपाधि मिली और उनके आदर्श आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के अध्यक्ष अभिषेक चंद्रा, आकाश गोयल (महामंत्री, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन), कविस मित्तल, रामगोपाल कंसल, कुंवर कुलदीप अग्रवाल, राजकुमार मित्तल, विवेक अग्रवाल, अजय गोयल, रतन अग्रवाल, विकास बंसल, कुशाग्र गर्ग, सुमित अग्रवाल, सावित्री मंगल, नीरज अग्रवाल, नवनीत गर्ग, डॉ. अरविंद मित्तल, संजय गोयल, अमित गोयल, विकास गोयल, नितिन गोयल, अरुण जिंदल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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