
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना):::
रुड़की। मदरहुड विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ नर्सिंग द्वारा "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर: इश्यूज़, चैलेंजेज़ एंड ऑपर्च्युनिटीज़ इन इंडिया" विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से 215 से अधिक शिक्षाविदों, चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने हिस्सा लेकर स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के भविष्य पर मंथन किया।

तकनीक से सुधरेगी मरीजों की देखभाल
संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा ध्यानी (रजिस्ट्रार, उत्तराखंड नर्सेज एंड मिडवाइव्स काउंसिल) और कुलपति प्रो. (डॉ.) नरेंद्र शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। डॉ. ध्यानी ने अपने संबोधन में कहा कि नर्सिंग प्रोफेशन में एआई का समावेश मरीजों की देखभाल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने छात्रों से तकनीकी कौशल विकसित करने की अपील की। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि टेलीमेडिसिन और रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक और किफायती बना रही है।

तीन सत्रों में विशेषज्ञ चर्चा
संगोष्ठी को तीन तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया था:
सत्र 1: प्रो. विजय लक्ष्मी वर्मा ने मेडिकल इमेजिंग और ड्रग डिस्कवरी में मशीन लर्निंग की भूमिका समझाई। प्रो. मनीष कुमार मिश्रा ने डेटा प्राइवेसी और एआई की कानूनी चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
सत्र 2: डॉ. मोहिता बोहरा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में एआई के एकीकरण पर जोर दिया, जबकि प्रो. गीता जोशी ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एआई-सक्षम मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को क्रांतिकारी बताया।
सत्र 3: प्रो. पियूष कपिल ने स्टार्टअप्स के अवसरों पर चर्चा की, वहीं प्रो. रेनुका पॉली दास ने 'नर्स + टेक्नोलॉजी' के भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ. चित्रा कपूर ने पैथोलॉजी में एआई के उपयोग से कैंसर जैसी बीमारियों के शुरुआती निदान पर जानकारी दी।

नवाचार के संकल्प के साथ समापन
कार्यक्रम का संचालन वंशिका सिंह ने किया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। नर्सिंग प्रिंसिपल प्रो. रेनुका पॉली दास ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के 'नवाचार' विजन का हिस्सा है। इस अवसर पर कुलसचिव अजय गोपाल शर्मा सहित आकांक्षा, नीलम जोशी, मनीषा, आस्था, देवांशु और संकेत का विशेष सहयोग रहा। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत 'सत्यम शिवम सुंदरम' नृत्य ने समां बांध दिया।
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