दैनिक रुड़की (फिरोज खान)::
मंगलौर। नगर पालिका परिषद मंगलौर ने वार्ड नं0 01 के चमारान खालसा' का नाम बदलने के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा दी है। शहरी विकास निदेशालय के निर्देश पर 23 अप्रैल को बोर्ड बैठक में नाम बदलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ था। लेकिन मौहल्ले के निवासियों के कड़े विरोध के बाद पालिका ने निर्णय लिया कि जनभावनाओं के अनुसार ही नाम बदला जाएगा। अब यह प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में दोबारा रखा जाएगा।
अधिशासी अधिकारी उत्तम सिंह नेगी ने राज्यमंत्री देशराज कर्णवाल को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उत्तराखण्ड शहरी विकास निदेशालय के निर्देशों के तहत जाति-सूचक नामों को हटाने की मुहिम मंगलौर में विवादों में घिर गई है। नगर पालिका परिषद ने वार्ड नं 1 स्थित 'चमारान खालसा' मौहल्ले का नाम बदलने का प्रस्ताव 23 अप्रैल की बोर्ड बैठक में पारित तो कर दिया, लेकिन जनता के विरोध के चलते 48 घंटे में ही फैसले पर रोक लगा दी।
दरअसल, शहरी विकास निदेशालय, देहरादून ने 5 जनवरी 2026 को पत्र जारी कर सभी निकायों को जाति-सूचक नामों को बदलने और एक्शन टेकन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में मंगलौर पालिका बोर्ड ने 'चमारान खालसा' के स्थान पर नया नाम रखने का प्रस्ताव पास किया।
अधिशासी अधिकारी द्वारा राज्यमंत्री देशराज कर्णवाल को भेजे पत्र के अनुसार, प्रस्ताव पास होने के बाद मौहल्ले के निवासियों ने तीव्र विरोध जताया। जनभावनाओं को देखते हुए पालिका ने तत्काल प्रभाव से प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
पत्र में कहा गया है कि अब 'जनभावनाओं के अनुसार निरस्त करने/निर्णय लिये जाने हेतु' इस प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में फिर से रखा जाएगा।
सरकार जाति-सूचक नाम बदलने का अभियान चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका विरोध भी सामने आ रहा है। मंगलौर का मामला इसका ताजा उदाहरण है।
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