दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
रुड़की। नगर निगम क्षेत्र में यूनिपोल (विज्ञापन पोल) पर बिना टेंडर और बिना अनुमति के विज्ञापनों का खेल अब खुलकर सामने आ गया है। हैरानी की बात यह है कि इन यूनिपोल का आधिकारिक ठेका समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद शहर भर में बड़े पैमाने पर विज्ञापन लगाए जा रहे हैं—जैसे किसी को नियम-कानून का कोई डर ही नहीं।
यह मामला अब सिर्फ अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का साफ आरोप है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर यह काम संभव नहीं है।
सबसे अहम सवाल यह है कि जब कोई वैध ठेका अस्तित्व में नहीं है, तो आखिर किसके इशारे पर और किस कंपनी द्वारा यह विज्ञापन लगाए जा रहे हैं? क्या नगर निगम को इसकी जानकारी नहीं, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं? अगर ऐसा है तो यह सीधे-सीधे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने और नियमों की अनदेखी का मामला बनता है।
नगर निगम के टैक्स ऑफिसर एसपी गुप्ता का कहना है कि बिना अनुमति के लगाए गए होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, दो दिन पहले ही कुछ यूनिपोल से विज्ञापन हटाए गए हैं और यह अभियान लगातार जारी है।लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर के कई प्रमुख स्थानों पर अब भी अवैध विज्ञापन खुलेआम लगे हुए हैं, जिससे निगम की कार्रवाई पर सवाल उठना लाजिमी है। अगर कार्रवाई हो रही है, तो फिर ये विज्ञापन अब तक क्यों नहीं हटे?
यह पूरा मामला अब जांच का विषय बन चुका है। सवाल सिर्फ अवैध विज्ञापनों का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है जो या तो नाकाम साबित हो रहा है या फिर जानबूझकर खामोश है।
शहरवासियों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जाए और अवैध रूप से विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए—ताकि भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लग सके।
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