
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
रुड़की। सन 2000 में जब उत्तराखंड का गठन हुआ, तब से लेकर आज तक रुड़की विधानसभा को एक कसक हमेशा खलती रही—कैबिनेट में प्रतिनिधित्व की कमी। कई सरकारें आईं, कई चेहरे बदले, लेकिन रुड़की के हिस्से में “मंत्री पद” का सपना अधूरा ही रहा।

अब यह इंतज़ार आखिरकार खत्म हो गया है। प्रदीप बत्रा ने इतिहास रचते हुए रुड़की को पहली बार कैबिनेट में मजबूत पहचान दिलाई है। उनके मंत्री बनने के साथ ही शहर में खुशी की लहर दौड़ गई है—ढोल-नगाड़ों, मिठाइयों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया जा रहा है।
संघर्ष से सम्मान तक का सफर
रुड़की की राजनीति में यह सफर आसान नहीं रहा।
2002 में पहली बार सुरेश चंद जैन विधायक बने
2007 में दोबारा जीत दर्ज की, लेकिन कैबिनेट का दरवाजा नहीं खुला
2012 में प्रदीप बत्रा ने कांग्रेस से जीत दर्ज की
2017 और 2022 में भाजपा से लगातार जीत हासिल कर उन्होंने जनता का भरोसा मजबूत किया

तीन बार विधायक बनने के बावजूद 2022 से 2026 तक उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। हर बार उम्मीदें जगीं, लेकिन नाम घोषित होने से पहले ही निराशा हाथ लगी।
आखिरकार खत्म हुआ ‘कैबिनेट का सूखा’
2026 में जब कैबिनेट विस्तार हुआ, तो रुड़की की वर्षों पुरानी उम्मीद साकार हुई। प्रदीप बत्रा को मंत्री बनाए जाने के साथ ही यह संदेश भी गया कि अब रुड़की को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जनता का जश्न, उम्मीदों की नई उड़ान
मंत्री बनने की खबर मिलते ही शहर में उत्सव का माहौल बन गया। समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं, सड़कों पर जुलूस निकले और लोगों ने इसे “रुड़की की जीत” बताया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदीप बत्रा ने न सिर्फ राजनीतिक मुकाम हासिल किया है, बल्कि उन्होंने रुड़की के 25 साल पुराने ‘कैबिनेट सूखे’ को भी खत्म कर दिया है।
अब नजरें विकास पर
कैबिनेट में जगह मिलने के बाद अब शहरवासियों की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। लोगों को विश्वास है कि मंत्री के रूप में प्रदीप बत्रा रुड़की के विकास को नई रफ्तार देंगे और लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को जमीन पर उतारेंगे।रुड़की की राजनीति में यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।
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