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3/13/2026 4:23:18 PM

मंगलौर में अलविदा जुमा पर पवित्र बाल मुबारक की ज़ियारत, सैकड़ों अकीदतमंदों ने किए दर्शन

दैनिक रुड़की (रियाज कुरैशी)::


मंगलौर/रुड़की। अलविदा जुमा के अवसर पर मंगलौर के मोहल्ला किला स्थित काज़मी हाउस में इस्लाम के आख़िरी पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद साहब की पवित्र दाढ़ी के बाल मुबारक तथा पीराने पीर हज़रत गौस-ए-आज़म के बाल मुबारक की ज़ियारत कराई गई। इस अवसर पर सैकड़ों अकीदतमंदों ने श्रद्धा के साथ पवित्र बाल मुबारक के दर्शन किए।

बाल मुबारक की ज़ियारत कराते हुए काज़ी जमाल काज़मी ने बताया कि मंगलौर में इस ऐतिहासिक पवित्र बाल मुबारक की ज़ियारत पिछले लगभग 700 वर्षों से उनके परिवार में होती चली आ रही है। उन्होंने बताया कि गुलाम वंश के शासक गयासुद्दीन बलबन (1262-1287) की इकलौती पौत्री का विवाह उनके पूर्वज सैयद हाशिम के साथ हुआ था, जो यहां के ज़मींदार थे। उस समय बिना दहेज के हुई इस शादी में उन्हें तीन अमूल्य तोहफे दिए गए थे—हज़रत मोहम्मद साहब की दाढ़ी का पवित्र बाल मुबारक, इस्लाम के सातवें इमाम सैयद इमाम मूसा काज़िम के हाथ से लिखा कुरान शरीफ तथा बगदाद के पीराने पीर हज़रत गौस-ए-आज़म का पवित्र बाल मुबारक।

काज़ी जमाल काज़मी के अनुसार इन पवित्र निशानियों की ज़ियारत हर वर्ष केवल रमज़ान के आख़िरी जुमा को ही कराई जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 200 वर्ष पहले काज़मी खानदान में फैली कुछ कुरीतियों के कारण यह बाल मुबारक गायब हो गया था। बाद में परिवार की एकमात्र क़ुरान हाफिज़ महिला उम्मे हानी जब हज पर गईं तो उन्होंने मदीना शरीफ में हज़रत मोहम्मद साहब के मज़ार के सामने रो-रोकर दुआ की। उसी रात उन्हें सपना आया कि अपने क़ुरान शरीफ को खोलकर देखें। जब उन्होंने ऐसा किया तो उसमें पवित्र बाल मुबारक सुरक्षित रखा मिला। तभी से यह ज़ियारत लगातार कराई जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलोरी ने बताया कि वे बचपन से ही पिछले 55 वर्षों से इस पवित्र बाल मुबारक की ज़ियारत करते आ रहे हैं और इसमें सभी धर्मों के लोग भी शामिल होते रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश-विदेश में हज़रत मोहम्मद साहब के कई बाल मुबारक मौजूद हैं, जिनमें अधिकतर उनके सिर के बाल बताए जाते हैं, जबकि मंगलौर में मौजूद बाल मुबारक उनकी दाढ़ी का बताया जाता है, जिसकी ज़ियारत को बेहद पुण्यकारी माना जाता है।

इस अवसर पर अलीम काज़मी, ख़तीब मौलाना रईस अहमद अर्शी कलियरी, अमजद काज़मी, हाफिज़ अहमदुल्लाह काज़मी, जावेद काज़मी, निसार अंसारी, मो. कुरैशी, आदिल काज़मी, अली हुसैन काज़मी, डॉ. अंजुम सहित अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले महिलाओं को घर के अंदर पवित्र बाल मुबारक की ज़ियारत कराई गई।

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