
दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::
रुड़की।नगर निगम रुड़की की ज़मीन पर बिना टेंडर प्रक्रिया और सक्षम अधिकारियों की अनुमति के एक निजी एडवरटाइजमेंट कंपनी द्वारा बूथ रखे जाने का मामला सामने आने के बाद शहर में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि इस अवैध गतिविधि से नगर निगम को वर्षों से लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
इस पूरे प्रकरण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए एक पुलिस बूथ को रुड़की के सरकारी अस्पताल के सामने नगर निगम की भूमि पर लाकर स्थापित किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब खुलेआम होता रहा, लेकिन जिम्मेदारों की नजर अब तक इस पर क्यों नहीं पड़ी — यह बड़ा सवाल बन गया है।
बताया जा रहा है कि जब वीडियो बना रहे व्यक्ति ने इस कथित अवैध कार्य का विरोध किया तो उसे रिकॉर्डिंग से रोका गया और उल्टा उस पर शराब के नशे में होने का आरोप लगा दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रॉली पर मौजूद व्यक्ति बिना किसी वैध अनुमति के बूथ रख रहा था और बातचीत में ‘एवन’ नामक कंपनी का जिक्र भी करता सुनाई दिया। हालांकि बूथ किसके आदेश पर और किसकी शह पर रखे जा रहे हैं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

आठ जगहों पर अवैध बूथ होने की चर्चा
सूत्रों की मानें तो नगर निगम क्षेत्र में करीब आठ स्थान ऐसे हैं, जहां इसी तरह पुलिस बूथ स्थापित कर दिए गए हैं। इन बूथों पर एक निजी अस्पताल के विज्ञापन भी लगे हैं। बताया जा रहा है कि इन विज्ञापनों का भुगतान सीधे संबंधित एडवरटाइजमेंट कंपनी के खाते में जा रहा है, जबकि नगर निगम को कोई राजस्व नहीं मिल रहा।

मिलीभगत की आशंका ने बढ़ाए सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि बिना टेंडर और बिना अनुमति नगर निगम की भूमि का इस्तेमाल कैसे हो रहा है। न कंपनी के खिलाफ कार्रवाई दिख रही है और न ही विज्ञापन स्थलों के लिए कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। ऐसे में निगम अधिकारियों और एडवरटाइजमेंट कंपनी के बीच संभावित मिलीभगत की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं।

अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश
मामले पर जब नगर आयुक्त राकेश तिवारी से बात की गई तो उन्होंने कर अधीक्षक को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं कर अधीक्षक एसपी गुप्ता ने कहा कि यदि अवैध रूप से होर्डिंग या बूथ रखे गए हैं तो संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी हो चुका है विरोध
यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व भी इसी तरह अवैध बूथ स्थापित किए गए थे, जिन्हें तत्कालीन मेयर गौरव गोयल ने निगम टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जब्त कर निगम परिसर में रखवा दिया था। इसके बावजूद एक बार फिर विज्ञापन कंपनी के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।
गैएंट्री बोर्ड पर भी नहीं हुई कार्रवाई
रुड़की के प्रवेश द्वारों पर लगे गैएंट्री बोर्ड भी कई बार सुर्खियों में रहे हैं। आरोप है कि इन पर लगातार फ्लेक्स लगाकर एडवरटाइजिंग कंपनियां मोटी कमाई कर रही हैं, लेकिन विभाग आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है?
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