दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::
भगवानपुर। भगवानपुर स्थित क्वांटम यूनिवर्सिटी परिसर में उत्तराखंड परिवहन विभाग, रुड़की द्वारा प्रथम उत्तरदाता एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित, सही एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सड़क सुरक्षा, दुर्घटनाओं से बचाव तथा दुर्घटना की स्थिति में घायल व्यक्ति के जीवन की रक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी दुर्घटना के बाद प्रारंभिक कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और यदि समय रहते उचित प्राथमिक उपचार दिया जाए, तो कई अनमोल जीवन बचाए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण सत्र के अंतर्गत हृदयाघात की स्थिति में सीपीआर देने की सही विधि, अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित करने के उपाय, हड्डी या बाँह टूटने की स्थिति में प्राथमिक उपचार, घायल व्यक्ति को सुरक्षित रूप से अस्पताल तक पहुँचाने की प्रक्रिया तथा आपातकालीन सेवाओं को सूचना देने की विधि पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षकों द्वारा मौके पर ही प्रदर्शन के माध्यम से इन तकनीकों को विस्तार से समझाया गया।
इस अवसर पर प्रवर्तन अधिकारी (एआरटीओ) अभिनंदन बहुगुणा, उपजिलाधिकारी रुड़की, सिटी मजिस्ट्रेट रुड़की तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के पीयूष विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का एक प्रमुख कारण समय पर सहायता न मिल पाना है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आमजन को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें एक जिम्मेदार प्रथम सहायता प्रदाता के रूप में सक्षम बनाते हैं।
कार्यक्रम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ, संभागीय परिवहन अधिकारी देहरादून संदीप सैनी, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के उप कमांडेंट दीपक, उनकी टीम तथा क्वांटम यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं विश्वविद्यालय प्रशासन का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम का आयोजन प्रवर्तन अधिकारी कृष्ण चंद्र पलाडिया, प्रशासनिक परिवहन अधिकारी जितेंद्र बहादुर चंद्र एवं उप संभागीय परिवहन कार्यालय, रुड़की के सौजन्य से किया गया, जिसके अंतर्गत प्रथम उत्तरदाता प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के जनहितकारी कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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