
दैनिक रुड़की (राहुल सक्सेना)::
रुड़की।2025 के निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद पूर्व मेयर यशपाल राणा को कांग्रेस ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। इसके बावजूद कांग्रेस के बड़े आयोजनों के आसपास राणा की मौजूदगी लगातार सवाल खड़े कर रही है।सोमवार को रुड़की के रामनगर स्थित एक होटल में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने राजभवन घेराव कार्यक्रम को लेकर बैठक की।
बैठक के भीतर रणनीति पर मंथन चल रहा था, वहीं बाहर सड़क किनारे एक अलग ही सियासी तस्वीर उभर रही थी।करीब एक से डेढ़ घंटे तक यशपाल राणा अपने समर्थकों के साथ होटल के बाहर खड़े नजर आए। न उन्हें अंदर बुलाया गया और न ही औपचारिक रूप से बैठक में शामिल किया गया।
जब इस बारे में प्रीतम सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा,
“मेरे और यशपाल राणा के निजी संबंध हैं। वह पार्टी से बाहर हैं, इसलिए होटल के बाहर खड़े हैं। अगर पार्टी में होते तो कार्यक्रम में शामिल होते।”
पहले भी दिख चुके हैं बाहर
यह पहला मौका नहीं है जब निष्कासन के बाद यशपाल राणा किसी कांग्रेस कार्यक्रम स्थल के बाहर नजर आए हों। इससे पहले लोक निर्माण विभाग में आयोजित कांग्रेस के सृजन अभियान के दौरान भी पर्यवेक्षकों द्वारा की गई बैठक के समय राणा को बैठक स्थल के बाहर देखा गया था। तब भी यही चर्चा रही थी कि राणा कार्यक्रम के अंदर जाने से पहले किसी संकेत या बुलावे का इंतजार कर रहे थे।
मजबूरी या उम्मीद?
सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि राणा बार-बार पार्टी कार्यक्रम स्थलों के बाहर ही नजर आते हैं?
क्या यह केवल निजी संबंधों की वजह है या फिर पार्टी में वापसी की एक आखिरी कोशिश?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो यदि केवल निजी मुलाकात करनी होती, तो कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी बातचीत संभव थी। लेकिन सार्वजनिक रूप से घंटों इंतजार करना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं अंदर से हरी झंडी मिलने की आस अब भी बाकी है।
अंदरखाने की खींचतान
सूत्रों के अनुसार, बैठक में यशपाल राणा की मौजूदगी की आशंका को लेकर कांग्रेस महासचिव सचिन गुप्ता ने पहले ही विरोध जता दिया था, जिसके चलते राणा को अंदर प्रवेश नहीं दिया गया।हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद यशपाल राणा और प्रीतम सिंह को एक ही गाड़ी में जाते हुए देखा गया। इस दृश्य ने कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी और संभावित सुलह की चर्चाओं को और हवा दे दी है।
सियासी संदेश साफ
एक के बाद एक कार्यक्रम स्थल के बाहर खड़े राणा यह संदेश दे रहे हैं कि दूरी भले ही संगठन ने बनाई हो, लेकिन राजनीति में दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस इंतज़ार को वापसी की शुरुआत बनाती है या फिर यह इंतज़ार यूं ही सड़कों पर खड़ा रह जाएगा।
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