दैनिक रुड़की (योगराज पाल)::
रुड़की। उत्तराखंड आंदोलन एवं पर्वतीय मूल के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन की तर्ज पर अंकिता हत्याकांड मामले में न्याय की अंतिम छोर तक लड़ाई लड़ी जाएगी। उक्त बात विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में ही सीबीआई जांच होनी चाहिए।वहीं इस मामले में 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद और आज 10 जनवरी को मशाल जुलूस निकालने की बात भी संगठन पदाधिकारियों ने कही। 
रुड़की टाकीज चौक स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में अशोक नगर क्षेत्रीय विकास समिति,चिह्नित आंदोलनकारी संघर्ष समिति,उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी समिति,युवा मंच,उत्तराखंड एकता मंच एवं गढ़वाल सभा के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर कहा कि अंकिता भंडारी मामले में आज तक कई राज ऐसे हैं जिनसे पर्दा उठना बाकी है।
कहा कि अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया कि वीआईपी कौन हैं और कितने हैं, भाजपा के पूर्व विधायक और उनकी पत्नी के द्वारा जो उजागर किया गया वह सच पूरा सामने आना चाहिए। रिसॉर्ट पर बुलडोजर किसने और किसके आदेश पर चलाया इसकी जांच होनी चाहिए।
कहा कि केवल सीबीआई जांच से कुछ स्पष्ट नहीं होने वाला है,यह जांच अगर करवानी थी तो ढाई साल पहले सरकार करवाती। कहा कि अगर अब सीबीआई जांच हो रही है तो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले में सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है।
लेकिन अब इस मामले में बिलंब हुआ तो और सच्चाई सामने नहीं आई तो उत्तराखंड आंदोलन के तर्ज पर आंदोलन होगा। इसी कड़ी में आज शाम को मशाल जुलूस और 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद किया जाएगा। दावा किया कि उत्तराखंड बंद में व्यापार मंडल का समर्थन मिल रहा है।पत्रकार वार्ता में हर्ष प्रकाश काला,कमला बमौला,राजेंद्र रावत,पूर्ण सिंह विष्ट,राकेश चौहान,एसएस बिष्ट,हेमंत बढ़थवाल,प्रवेश कुमार जोशी,अनिल उप्रेती,प्रेम सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।

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