तो यह कारण रहा एकाएक चौधरी यशवीर की भाजपा में एंट्री का……..

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दैनिक रुड़की(दीपक/राहुल)::-

 रुड़की। आज चौधरी कुलवीर की पत्रकार वार्ता के बाद एक बात तो साफ हो गयी कि चौधरी यशवीर की एकाएक भाजपा में एंट्री झबरेड़ा विधायक और चौधरी कुलवीर के बीच पैदा हुई खटास का नतीजा है। वरना अब तक राजनीतिक गलियारों में यह सवाल घूम रहा था कि जो कर्णवाल चौधरी यशवीर का भाजपा में शामिल होने का विरोध कर रहे थे अचानक वह ही भाजपा और यशवीर के बीच मे पुल बने नजर आए।

बीती 18 मार्च को चौधरी यशवीर ने पुत्र गौरव चौधरी और समर्थकों समेत कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। उसके कुछ दिनों बाद जब एक ओर लोकसभा चुनाव और दूसरी ओर चैम्पियन कर्णवाल विवाद अपने चर्म पर था उस समय चौधरी यशवीर और चैम्पियन की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। मीडिया के पूछे जाने पर चैम्पियन ने बताया कि चौधरी यशवीर और उनके पुत्र भाजपा में शामिल हो रहे हैं कार्यक्रम तय हो चुका था देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में पिता पुत्र को भाजपा में शामिल किया जाना था लेकिन तभी खबर आई कि झबरेड़ा विधायक कर्णवाल नही चाहते कि चौधरी यशवीर भाजपा में शामिल हो। इसके बाद यशवीर की भाजपा में एंट्री ठंडे बस्ते में चली गयी। चुनाव सम्पन्न हुए तो चैम्पियन और कर्णवाल विवाद फिर नए जोश के साथ शुरू हुआ। इसी बीच अचानक कर्णवाल ने अंबेडकर जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें पहुंचे भाजपा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नरेश बंसल ने चौधरी यशवीर और उनके पुत्र को भाजपा में शामिल किया गया। अब फिर सवाल उठा कि चौधरी यशवीर को भाजपा में शामिल होने का विरोध करने वाले कर्णवाल ने अचानक बड़े बाऊजी की भाजपा में एंट्री क्यों करवाई। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तब से ही हवा में तैर रहा था जिसका जबाब आज शायद लोगों को मिल गया हो। कर्णवाल की दूरियां जैसे ही छोटे बाऊजी से बढ़ी तो उन्हें बड़े बाऊजी की याद आयी। क्योंकि यह तो जग ज्ञात है कि झबरेड़ा की सियासत का केंद्र चौधरी परिवार है और उनके संरक्षण के बिना क्षेत्र की सियासत शायद नामुमकिन है।

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