पांच साल बाद मिले दो जुड़वां भाई-ऋषिकेश पुलिस का रहा बड़ा योगदान-पैदा करने वाली मां ने ही किया था जुदा……

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दैनिक रुड़की (दीपक अरोड़ा)::-

ऋषिकेश । ऋषिकेशकोतवाली में पुलिस ने सेरोगेट मदर मामले में धोखाधड़ी का खुलासा किया। बच्चे के माता-पिता ने पांच साल बाद उसकी सूरत देखी, ये दृश्य भावुक करने वाला था। जुड़वा भाई जब एक दूसरे से मिले तो उन्हें लगा जैसे शीशे में खुद को देख रहे हों।  
दरअसल, इस मामले में बीते साल छह मार्च 2018 को आशुतोष नगर देहरादून मार्ग ऋषिकेश निवासी विजय वर्धन सिंह रावत ने मेरठ निवासी सरोगेट मदर नूपुर उर्फ अजंता के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। विजयवर्धन रावत के मुताबिक उन्होंने नूपुर उर्फ अजंता से सेरोगेसी के जरिए संतान पैदा करवाई थी। इलाज के दौरान ही उन्हें पता चल गया था कि अजंता की कोख में जुड़वा बच्चे हैं। प्रारंभिक इलाज के बाद साल 2015 में नूपुर पश्चिम बंगाल अपनी मां के पास चली गई। जहां उसने दो बच्चों को जन्म दिया। नूपुर ने विजय वर्धन सिंह रावत को एक बच्चा जीवित होने और एक के पैदा होने के दौरान मृत्यु होने की बात बताई। एक बच्चा तभी नूपुर ने विजय वर्धन दंपति को सौंप दिया। विजय वर्धन रावत को जब शक हुआ तो उन्होंने जानकारी जुटाई। जिसमें पता चला कि नूपुर ने दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया था। 
मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच में जुटी पुलिस ने धोखाधड़ी की आरोपित नूपुर को सितंबर 2018 में गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस को जांच में पता चला कि नूपुर ने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन दूसरा बच्चा बरामद नहीं हो पाया। रविवार को पुलिस ने मेरठ में नूपुर के रिश्तेदार के घर से बच्चे को बरामद किया। सोमवार को ऋषिकेश कोतवाली में आयोजित पत्रकार वार्ता में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण परमेंद्र सिंह चौहान पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने पालमपुर मेरठ निवासी पंडित गौतम मुखर्जी को भी गिरफ्तार किया है। पंडित गौतम मुखर्जी के पास यह बच्चा नूपुर की गिरफ्तारी के बाद से रह रहा था। इस दौरान जब बरामद बच्चे से उसके मां-बाप मिले तो उनकी आंखें छलक आई। उनके पास पहले से मौजूद दूसरे बेटे से उसके भाई को मिलाया गया तो दोनों की शक्ल हूबहू थी। दोनों एक दूसरे को ऐसे देखने लगे। इस दौरान ऐसा लग रहा था मानो अपने आप को शीशे में देख रहे हों।

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